सखी सईंया तो खूब ही कामात हैं,
महँगाई डायन खाए जात है !
ये सिर्फ मध्य प्रदेश के गांवो में गाया जाने वाला एक गाना नहीं है ! ये है व्यथा आज के हर परिवार की ! ये है व्यथा आज के समाज की ! और, ये व्यथा तब तब हुई जब जब देश में कांग्रेस की सरकार आई ! कहने को तो काँग्रेसी कहते हैं की कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ पर देखने वालों को तो कांग्रेस का हाथ आम आदमी की गर्दन पे लगता है ! ये हालात चिंता जनक इसलिए भी है क्योंकि सरकार की कमान हमारे देश के सबसे बड़े अर्थशाष्त्री के हाथो में है ! एक ऐसा प्रधान मंत्री जिसके अर्थ्शाश्त्रिक ज्ञान पे तनिक भी संदेह नहीं किया जा सकता लेकिन फिर भी समस्या तो सुरसा की तरह मुह फैलाय खड़ी है ! कही न कही कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है और ऐसी परिस्थितियों में सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती !
हमारे लोकतंत्र ने हमे ये अधिकार दिया है की अगर हम सरकार के काम काज से खुश न हो तो हम उसका विरोध कर सकते हैं ! हमे अधिकार है अपनी आवाज बुलंद करने का ! और, हमें अधिकार है किसी भी निकम्मी और तानाशाह सरकार को ज़मीन पे ला पटकने का !
कल के भारत बंद का जो प्रभाव पुरे देश में दिखा वो अपने आप में अभूतपूर्व है ! दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, पटना, भोपाल, लखनऊ सब जगह दुकानें, बाज़ार, विद्यालय, संस्थान सब बंद थे, शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा की जनता खुद आगे बढ़ कर बंद का समर्थन कर रही थी ! यह एक संकेत है मनमोहन सिंह की सरकार के लिए ! यह दर्शाता है की सरकार ने अभी भी बढती हुई महँगाई पे ध्यान नहीं दिया तो फिर जनता सड़को आ जाएगी और मनमोहन सिंह को अपना कार्यकाल पूरा करना कठिन हो सकता है !